Meer Taqi Meer: इश्क़ का दर्द  बयाँ करने वाली बेहतरीन ग़ज़ल !

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Credit: Meer Taqi Meer

लफ़्ज़-ओ-मानी के जादूगर, बेमिसाल शायर मीर तक़ी ‘मीर’ उर्दू ग़ज़ल का वो प्रेत हैं जिनका जन्म आगरा शहर (उत्तर प्रदेश) में हुआ ! 

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क्या हक़ीक़त कहूं कि क्या है इश्क़ हक़-शनासों के हां ख़ुदा है इश्क़ !

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दिल लगा हो तो जी जहाँ से उठा मौत का नाम प्यार का है इश्क़ !

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और तदबीर को नहीं कुछ दख़्ल इश्क़ के दर्द की दवा है इश्क़ !

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क्या डुबाया मुहीत में ग़म के हम ने जाना था आश्ना है इश्क़ !

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इश्क़ से जा नहीं कोई ख़ाली दिल से ले अर्श तक भरा है इश्क़ !

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कोहकन क्या पहाड़ काटेगा पर्दे में ज़ोर-आज़मा है इश्क़ !

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इश्क़ है इश्क़ करने वालों को कैसा कैसा बहम किया है इश्क़ !

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कौन मक़्सद को इश्क़ बिन पहुंचा आरज़ू इश्क़ मुद्दआ है इश्क़ !

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'मीर' मरना पड़े है ख़ूबां पर इश्क़ मत कर कि बद बला है इश्क़ !

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अब एक Like तो बनता है ! Next story 👇  Juan Elia sad poetry - बिछड़ने पर एक बेहतरीन ग़ज़ल 

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