Love Ghazal - इश्क़ होने पर खूबसूरत ग़ज़ल शायरी !

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By Usman Khan

जब से तुम मिले तुम से ही जानां मेरी हर पल इश्क़ हुआ, हो जब से तुम मिले मुकम्मल इश्क़ हुआ।

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हो गई कुबूल दुआएँ माँगी थी रब से मैंने, करम खुदाया देखो मुकम्मल इश्क़ हुआ ।

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ख़्वाबों में आते जाते रहे थे अब तक तुम, मिले हक़ीक़त में तो मुकम्मल इश्क़ हुआ।

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आगोश में ले कर निग्राहों में तुमने सनम, देखा जो शरारत से मुकम्मल इश्क़ हुआ।

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आहिस्ता से कानों में इज़हार-ए-मोहब्बत, इज़हार-ए- हाय! किया हौले से मुकम्मल इश्क़ हुआ।

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मिरी ज़िंदगी में शामिल हो गए 'राही' वो, मुझको है अपनाया मुकम्मल इश्क़ हुआ।

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