तहज़ीब हाफी  के कुछ खास शेर Credit : Tehzeeb haafi

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ये मैंने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे, अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे....

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मैं उसके साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी, उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे ।

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~Tehzeeb Haafi

तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो, तो फिर ये बताओ कि तुम उसकी आंखों के बारे में क्या जानते हो,

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ये ज्योग्राफिया, फ़लसफ़ा, साइकोलाॅजी, साइंस, रियाज़ी वगैरह ये सब जानना भी अहम है मगर उसके घर का पता जानते हो ?

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~Tehzeeb Haafi

ये दुःख अलग है कि उससे मैं दूर हो रहा हूँ, ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है,

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तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझको मशहूर कर रहा है

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~Tehzeeb Haafi

मैंने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा, तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा

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~Tehzeeb Haafi

कौन तुम्हारे पास से उठ कर घर जाता है तुम जिसको छू लेती हो वो मर जाता है, 

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~Tehzeeb Haafi

क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं....

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इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर, ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं.

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~Tehzeeb Haafi

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