Story and shayari by Muskan  ~Guest writer of   डायरी की शायरी

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कैसे भूल जाऊं तेरा वो सितम, जो तू मुझपे किया करता था....

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रहता था हमेशा फ़्री और, बिजी बताया करता था...

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कि तुझसे बात करने को तरसती थी, तू अपनी ही दुनिया मे मगन रहता था....

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कैसे भूल जाऊं..….. टाइम पास करना होता था तुझे, तब मुझपे प्यार लुटाया करता था..

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वर्ना भरी महफ़िल में इगनोर करके , मेरी औक़ात बताया करता था...

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कैसे भूल जाऊं तेरा हर वो सितम, जो तू मुझपे किया करता था।

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