Poetry for love: प्यार के बिछड़ने पर ग़ज़ल - रस्म ए जुदाई यूं निभाई जाए...

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By Prakash Kumar

रस्म ए जुदाई यूं निभाई जाए जाने वाला खुशी खुशी जाए !

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मैं बाद में बिछड़कर रो दूंगा जिसे भी जाना हो अभी जाए !

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है कोई तदबीर जिससे ऐसा हो कि तेरे साथ साथ मेरी ज़िंदगी जाए !

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मैं तंग आ गया हूं सुखनवरी से अब अब न कोई गज़ल कही जाए !

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ये फकत मेरा इलहाम नहीं है बज़्म चाहती है तू बोलती जाए !

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